लखनऊ: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) से जुड़ा कथित धर्मांतरण मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। इस प्रकरण में मुख्य आरोपी बताए जा रहे डॉ. रमीज मलिक की फरारी, संदिग्ध फंडिंग और प्रतिबंधित संगठन PFI से कथित संबंधों ने प्रशासन, पुलिस और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। मामले को लेकर महिला आयोग, केजीएमयू प्रशासन और डॉक्टर आमने-सामने आ गए हैं।
18 दिनों से फरार आरोपी, जांच में बड़े खुलासे
पुलिस के अनुसार, डॉ. रमीज मलिक बीते 18 दिनों से फरार है। इस दौरान वह लगातार अलग-अलग ठिकानों पर छिपता रहा। जांच में सामने आया है कि फरारी के दौरान उसे लाखों रुपये की संदिग्ध फंडिंग मिली, जिससे उसने न सिर्फ अपने छिपने का इंतजाम किया बल्कि महंगे वकीलों से भी संपर्क किया।
पुलिस सूत्रों का दावा है कि इस फंडिंग के तार प्रतिबंधित संगठन PFI और कुछ संदिग्ध व्यक्तियों से जुड़े हो सकते हैं। आरोपी के बैंक खातों में बाहर से पैसा आने की जानकारी भी सामने आई है। फिलहाल पुलिस उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली और उत्तराखंड में भी उसके मददगारों की तलाश में छापेमारी कर रही है।
महिला आयोग का प्रशासन पर गंभीर आरोप
मामले ने उस समय तूल पकड़ लिया जब उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव केजीएमयू परिसर पहुंचीं। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन और जांच समितियों पर आरोप लगाया कि आरोपी को संरक्षण दिया जा रहा है।
अपर्णा यादव का कहना है कि
“निष्पक्ष जांच के बजाय कुछ प्रोफेसरों को बचाने की कोशिश हो रही है। विशाखा कमेटी और प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े होते हैं।”
उन्होंने यह भी दावा किया कि विश्वविद्यालय परिसर, खासकर वीसी कार्यालय के पास, पहले धार्मिक गतिविधियां होती रही हैं। इस पूरे मामले को लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से औपचारिक शिकायत की है।
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